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कोरोनावायरस के विभिन्न स्ट्रेन को भारतीय-ब्राज़ीलियाई-अफ्रीकी-ब्रिटिश वेरिएंट कह सकते हैं तो वायरस को चाईनीज़ वेरिएंट क्यों नहीं ?

30 Apr-2021

आजकल अखबारों में चाईनीज़ कोरोनावायरस को लेकर तरह-तरह के वेरिएंट की बात की जा रही है। कभी भारतीय वेरिएंटट तो कभी यूके वेरिएंट। कभी अफ्रीकी वेरिएंट तो कभी ब्राज़ीलियाई वेरिएंट।

कोरोनावायरस के कई नए स्ट्रेन आ चुके हैं और इन सभी को उन देशों के नाम के साथ जोड़ा जा रहा है जहां उसका पहला संक्रमण केस सामने आ रहा है। इसमें भारत दक्षिण अफ्रीका ब्राजील यूके और अफ्रीका शामिल है।

समय-समय पर इसके तमाम लक्षणों की जांच की जा रही है और बताया जा रहा है कि कौन सा वेरिएंट ज्यादा खतरनाक है और कौन सा वेरिएंट कम खतरनाक है।

पूरी दुनिया इस वायरस से जूझ रही है और भारत में दूसरे लहर में स्थिति अत्यंत ही गंभीर हो चुकी है। लेकिन इन सबके बावजूद चीनी कम्युनिस्ट प्रोपेगेंडा मशीनरी पूरे विश्व में अपने काम में लगी है।

आपने भारत-दक्षिण अफ्रीका समेत दुनिया के अलग-अलग देशों के वायरस वेरिएंट के नाम जरूर सुने होंगे लेकिन क्या आपने इसके चीनी वेरिएंट का नाम सुना है?

क्या किसी आधिकारिक बयान में या किसी मीडिया ने आधिकारिक तौर पर कोरोनावायरस को चाईनीज़ वायरस कहना शुरू किया है?

जिस चीन से वायरस पूरी दुनिया में फैला वहां के वेरिएंट का नाम लेने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी आपत्ति जता दी। लेकिन जब अब अलग-अलग देशों के नाम के साथ वायरस के नए-नए वेरिएंट को जोड़ा जा रहा है तब विश्व स्वास्थ संगठन चुप्पी साधे क्यों बैठा है?

बात सिर्फ विश्व स्वास्थ्य संगठन के नहीं ऐसे लोगों की भी है जिन्होंने चीनी कम्युनिस्ट सरकार का जमकर बचाव किया। चीनी सरकार के पक्ष में लेख लिखें और वायरस को चीन से जोड़ने पर ट्विटर में जमकर नारेबाजी भी की।

लेकिन जब वायरस के नए नए वेरिएंट को विभिन्न देशों के नाम से जोड़ा जा रहा है तब यह सभी चुप्पी साध कर बैठ गए हैं।

आज पूरा विश्व चीन की वजह से भयावह स्थिति से गुजर रहा है। हर दिन हजारों लोग मारे जा रहे हैं। चीन से फैले इस वायरस से पूरी दुनिया को घेर लिया है। भारत सहित यूरोप अमेरिका बुरी तरह से संघर्ष कर रहे हैं। पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था वेंटीलेटर पर है। यह सब कुछ चीन की वजह से हुआ है।

जब पूरी दुनिया समझ रही है कि चीन की गलतियों और लापरवाही के कारण यह वायरस दुनिया में फैला हुआ है वहीं दूसरी ओर कम्युनिस्ट और वामपंथी समूह लगातार चीन की रक्षा में लगा हुआ है। भारतीय वेरिएंट और विभिन्न देशों के वायरस वेरिएंट की बात करने वाले लोग चाईनीज़ वायरस कहने पर या घोषित कर चुके हैं कि ऐसा कहना नस्लीय जातीय टिप्पणी है।


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