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बंगाल में ममता के गुंडों का आतंक, महिलाओं से रेप एवं बदसलूकी जारी और 11 विपक्षी कार्यकर्ताओं की हत्या

04 May-2021

पश्चिम बंगाल के चुनावी परिणाम घोषित होने के बाद से ही टीएमसी के गुंडे लगातार भाजपा समर्थको और भाजपा के संपत्ति को ध्वस्त करने में लगे हुए है। चुनाव के बाद कि हिंसा सिर्फ खबरों में नही बल्कि कई वीडियो क्लिप ही बिल्कुल साफ कहानियां बयां कर रही है।

क्या दीदी ने इसलिए सत्ता में वापसी की है ताकि पूरे बंगाल में उनके खिलाफ कोई बोलने को खड़ा न हो सके।

चुनाव के दौरान देश भर की मीडिया बंगाल में थी ज्यादातर मीडिया के साथियों से बात करने के दौरान यह पता चला कि बंगाल सरकार द्वारा चलाए जा रहे योजनाओं का लाभ आम जनता को ये देखकर दिया जाता है कि कौन टीएमसी समर्थक है और थोड़ा बहुत भी झुकाव रखता है या नही उस पर ये तय होता है की योजनाओं का लाभ उसे मिलेगा या नहीं। 

परिणाम घोषित होने के बाद से बंगाल में हिंसा चरम पर, 11 भाजपा समर्थको की हत्या

2मई जिस दिन परिणाम घोषित हुए है उस दिन से लेकर सोमवार शाम तक पश्चिम बंगाल में अलग-अलग जगहों पर कई हिंसाओं को अनजाम दिया गया हैं।

ऐसी हिंसा को अंजाम देने वाले टीएमसी के गुंडों को ही दोषी बताया जा रहा है। हिंसा के बीच 11 भाजपा समर्थको की भी हत्या कर दो गयी है और ऐसे में दीदी अपने जश्न में मशगूल है आख़िरकार कोई अगर पिछले 10 वर्षो से किसी राज्य का मुख्यमंत्री हो तो राज्य में होने वाली हिंसा का कारण नही जान पाएगा या फिर उस पर रोक लगा पाने में सक्षम नही होगा।

ऐसा लगता है मानो इन्हीं मौतों से दीदी का ताज सजना है। आखिरकार क्या अगले 5 वर्षो तक बंगाल में इसलिए तृणमूल काँग्रेस आयी है ताकि इस प्रजातांत्रिक देश में कोई भी व्यक्ति सत्ता के खिलाफ न बोल सके विपक्ष के लोगो का जड़ से सफाया कर दिया जाए चाहे उसके लिए जान से ही क्यों न मारना पड़े।

दीदी ने जिस प्रकार से सेक्युलर होने का चादर ओढ़कर लगातार राष्ट्रवादियों के ऊपर गाज गिराया है यह टीएमसी के लोगो के प्रति सोच को दिखाता है। 

महिलाओं के साथ बलात्कार, मारपीट-छेड़ छाड़ की कई खबरे, वही कई भाजपा समर्थको को छोड़ने पड़े गांव

जहाँ एक ओर ममता बैनर्जी की जीत के पीछे महिलाओं का साथ बताया जा रहा है वही दीदी ने भी बंगाल की जनता से वहाँ की महिलाओं से उनके सुरक्षा और सम्मान पर आंच न आने देने का विश्वास दिलाकर वोट मांगा था उसके विपरीत स्तिथियाँ दीदी के सत्ता में लौटने के बाद दिखी।

भाजपा ने आरोप लगाया है कि बीरभूम जिले के नंनुर में बीजेपी की 2 बूथ महिला कार्यकर्ताओ के साथ गैंग रेप किया गया है। महिलाओं के साथ कई जगहों से छेड़छाड़ की खबरे आ रही है।

जिस राज्य की मुख्यमंत्री खुद महिला हो और उसके बावजूद जीत के तुरंत बात महिलाओं पर इतने अत्यचार की खबरे ये बंगाल में टीएमसी की महिलाओं के प्रति गंदी सोच को दर्शा रहा है।

एक वीडियो ने जिसमे महिलाओं के साथ पुरुष बुरी तरह मार पीट करते दिख रहे है वो सोशल मीडिया में इतना वाइरल हो रहा है कि अब पूरे देश मे बंगाल के लिए महिलाओं के प्रति होती ऐसी कृत्यों के लिए 'शेम' ट्विटर पर ट्रेंड हो रहा है। बीरभूम में लगभग 1000 लोगो को अपने गाँव छोड़कर दूसरे स्थानों पर पनाह लेनी पड़ रही है।

उनका दोष सिर्फ इतना है कि ये सभी 1000 लोग हिन्दू है और कुछ लोग भाजपा समर्थक है। ऐसी बद से बदतर हालात में बंगाल पुलिस द्वारा इन खबरों को फेक बताया गया है। 

नंदीग्राम में मानो जनता ने भाजपा को चुनकर पाप ही कर दिया हो, सुभेन्दु पर हमले के साथ घरों, दुकानों में तोड़ फोड़

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम सीट पर परिणाम घोषित होने के बावजूद दीदी ने प्रेस वार्ता में कहा कि नंदीग्राम जहाँ से वह हार गई वहाँ के इस परिणाम को कोर्ट में चुनौती देंगी।

आखिरकार घमंड की वजह से अपनी सीट छोड़कर नंदीग्राम से लड़ना और उसके बाद भी हारने पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाना दीदी पर कई सवाल खड़े करता है। सुभेन्दु अधिकारी के जीतने के तुरंत बाद ही टीएमसी समर्थको ने सुभेन्दु की गाड़ी पर पथराव कर दिया।

मोटे तौर पर सुभेन्दु पर जानलेवा हमला हुआ ऐसा भी समझा जा सकता है जिस प्रकार से वीडियो क्लिप में दिख रहा है।

उस दिन रात से ही पूरे नंदीग्राम में इधर उधर से हिंसा की खबरे आने लगी। अगले दिन सुबह तक नंदीग्राम में कई दुकानों और घरों में तोड़फोड़ हुई और उन सभी अराजक्ताओ मे टीएमसी के समर्थक संलिप्त थे।  

राज्य की राजधानी कोलकाता में भी हिंसा की खूब खबरे

दंगाइयों का या ये कहे कि जीत की जश्न और घमंड से चूर टीएमसी समर्थको का कोहराम कोलकाता में भी देखने को मिला। कोलकाता के उलटा डांगा में एक भाजपा कार्यकर्ता को पीट-पीट कर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। राजधानी के साल्टलेक, न्यूटाउन, भांगड़ क्षेत्रो में पूरी रात लड़ाई-झगड़े और तोड़-फोड़ होते रहे।

हावड़ा के एक भाजपा कार्यकर्ता के दुकान पर लूट पाट की घटना को टीएमसी के कार्यकर्ताओं द्वारा अंजाम दिया गया जिसका वीडियो भी पूरे देश मे खूब वाइरल हो रहा है।

आखिरकार क्या इसलिए ही दीदी ने लोगो से वोट मांगे थे। क्या बंगाल की जनता ने इसलिए दीदी पर विश्वास किया था।

जनजाति समाज के लोगों को बनाया निशाना

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जीत के बाद जिस तरह से हिंदुओं और जनजाति समाज के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है उससे पूरा देश कराह उठा है। चुनाव के नतीजे आते ही उनका बनर्जी के राजनीतिक गुंडों का आतंक सभी और फैल चुका है। भाजपा के कार्यकर्ताओं उनके कार्यालय के अलावा हिंदू समुदाय और जनजाति समुदाय के लोगों के साथ-साथ उनके मंदिरों और दुकानों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

पूर्व मेदिनीपुर, पूरबा बर्धमन, बीरभूम, कूचबिहार समेत बंगाल के तमाम क्षेत्रों में राजनीति गुंडे हिंदुओं और जनजाति समाज के लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं।

पूरबा बर्धमन क्षेत्र में मुख्यतः बहुसंख्यक आबादी में जनजाति समाज के लोग निवास करते हैं। इस चुनाव में जनजाति समाज के लोगों ने भारी संख्या में भाजपा को अपना समर्थन दिया है। इसी मामले पर अपना आक्रोश निकालते हुए टीएमसी के गुंडों ने जिले के कांकोरा में 3 मई को पूरा का पूरा गांव जला दिया जहां जनजाति समाज के लोग निवास करते थे।

जनजाति समाज के लोग भयभीत होकर अपने घरों से भाग गए हैं और जंगलों में जाकर छुप गए हैं। 

इसके अलावा बीरभूम क्षेत्र में भी 1,000 से अधिक हिंदू परिवार लूट के भय से अपना घर छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं। राजनीतिक गुंडों के द्वारा गांव की महिलाओं से छेड़छाड़ और बदसलूकी भी की गई है।

लेख


ऋषभ तिवारी (विवान)
सब-एडिटर, द नैरेटिव
माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र
राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले सम सामयिक मुद्दों पर, देश में घटने वालो राजनीतिक मुद्दों पर, चुनावी मुद्दों पर और खास तौर पर उभरे अनोखे मुद्दों पर लेख लिखने में खास रुचि रखते है


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