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रूसी सुरक्षा प्रमुख ने अमेरिका में अशांति के लिए जॉर्ज सोरोस पर लगाया आरोप, जानिए कौन है हिन्दू विरोधी सोरोस जिसके कांग्रेस से करीबी संबंध है

01 May-2021

रूस के स्पूतनिक न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार रूसी सुरक्षा परिषद के प्रमुख निकोलाई पैट्रूशेव ने कुख्यात अरबपति जॉर्ज सोरोस पर पॉलिटिकल डिस्कोर्स को आकार देने और अमेरिका सहित अन्य देशों में अशांति पैदा करने का आरोप लगाया है।

निकोलाई पैट्रिशेव ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जैसा कि आप जानते हैं जो जैसा बीज बोता है वैसी ही फसल काटता है। वही सोरोस फाउंडेशन (विदेशों में रंगभेद से जुड़ी क्रांतियों और अमेरिका में विरोध प्रदर्शन में शामिल) की अपनी सभी योजनाओं को खत्म करने की कोई योजना नहीं है। जबकि वह अपने सभी कार्यों को अब एक व्यवस्थित तरीके से बढ़ाने में लगा हुआ है।"

उन्होंने जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसायटी फाउंडेशन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका में जिस तरह जॉर्ज फ्लॉएड की एक गोरे पुलिस अफसर के द्वारा मृत्यु के बाद अमेरिका में अशांति पैदा की गई उसके पीछे इसी फाउंडेशन का हाथ था।

यह जानना बेहद आवश्यक है कि कुख्यात अरबपति जॉर्ज सोरोस ने विश्व के तमाम देशों में सरकारी नीतियों को हस्तक्षेप करने के लिए तमाम सिविल सोसायटी में अपना धन निवेश किया है। इसी वजह से उसके सभी एनजीओ को रूस में 2015 में प्रतिबंधित कर दिया गया था।

रूसी सुरक्षा परिषद के प्रमुख आगे अपने बयान में कहा कि "जॉर्ज सोरोस और उनके सरोगेट ऐसे मानदंडों को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जो सरकारों के द्वारा आपत्तिजनक घोषित है और इसके आगामी परिणाम काफी चिंताजनक होंगे। मुझे लगता है कि वह समय दूर नहीं है जब पश्चिम के देश ऐसे गैर-सरकारी संगठनों के रिपोर्ट के आधार पर विश्व के किसी अन्य संप्रभु राज्य पर प्रतिबंध लगाने और तो और किसी मिलिट्री स्ट्राइक को लॉन्च करने में भी नहीं हिचकेंगे।

स्पूतनिक न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार जॉर्ज सोरोस ने अपने गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से 1990 के दशक के दौरान यूक्रेन और रूस में 'रंग क्रांतियों' को वित्त पोषित किया था। यह विद्रोह फिर वर्ष 2000 और 2010 के दशक तक पूर्व के सोवियत देशों में फैल गए थे। इसके अलावा इस कुख्यात अरबपति ने 50 अन्य संगठनों के साथ गठजोड़ कर डॉनल्ड ट्रंप को सत्ता से हटाने के लिए प्रयास किया है।

भारत में जॉर्ज सोरोस की गतिविधियां और नरेंद्र मोदी को हटाने की चाल

जॉर्ज सोरोस ना सिर्फ भारत से, नरेंद्र मोदी से बल्कि हिंदुओं से भी अपने नफरत के कुख्यात है। खासकर यही वह व्यक्ति है जो भारत में हिंदुओं को निशाना बनाते हुए ईसाई धर्म में परिवर्तित कराने के लिए शामिल लोगों में से एक है।

सोरोस द्वारा भारत में किए जा रहे तमाम तरह की फंडिंग में रुकावट तब आई जब 2014 में भाजपा की सरकार केंद्र में सत्ता में आई और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। सत्ता में आने के बाद से भाजपा सरकार ने विदेशी फंडिंग को लेकर जिस तरह की नीतियां अपनाई उससे जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसायटी फाउंडेशन को अपने एजेंडे में रुकावटों का सामना करना पड़ा।

भारत सरकार के द्वारा 20,000 से अधिक गैर सरकारी संगठनों अर्थात एनजीओ को ब्लैकलिस्ट किया गया। इसमें कई ऐसे एनजीओ थे जिन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जॉर्ज सोरोस या उसके फाउंडेशन की तरफ से वित्त पोषित किया जाता था।

ओपन सोसायटी फाउंडेशन पर कई तरह के आरोप लगे। इस फाउंडेशन पर केंद्र सरकार को गिराने की कोशिश करने के भी आरोप लगे। इसके अलावा भारत में रोहिंग्या घुसपैठियों को कानूनी एवं अन्य सहायता देने में भी ओपन सोसाइटी फाउंडेशन शामिल रहा।

इन्हीं सभी कारणों की वजह से ओपन सोसायटी फाउंडेशन, द वर्ल्ड मूवमेंट फॉर डेमोक्रेसी और नेशनल एंडोवमेंट फॉर डेमोक्रेसी नामक तीन गैर सरकारी संगठनों को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निगरानी पर रखा।

कांग्रेस के भी भारत विरोधी जॉर्ज सोरोस से लिंक सामने आए हैं। सोरोस ने राजीव गांधी फाउंडेशन को फंड दान किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वर्तमान में केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी जॉर्ज सोरोस को अपना पुराना मित्र बताया। इसके अलावा उन्होंने सोरोस को एक निवेशक से बढ़कर बताया।

दुनिया भर की सरकारों को या उन सरकारों की नीति निर्माताओं को जॉर्ज सोरोस और उनके फाउंडेशन के द्वारा किस तरह प्रभावित किया जाता है इसका सबसे बड़ा उदाहरण है पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की बेटी अमृता सिंह सोरोस के ओपन सोसाइटी जस्टिस इनीशिएटिव के लिए जुड़ी है।

जॉर्ज सोरोस ने ह्यूमन राइट्स वॉच नामक संस्था को 100 मिलियन डॉलर फंड किया था। इस ह्यूमन राइट्स वॉच नामक संस्था की चर्चा भारत में तब सामने आई जब कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन में अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने ट्वीट किया जिसमें रिहाना नामक एक सिंगर शामिल थी जिसमें कथित तौर पर पैसे लेकर भारत के खिलाफ ट्वीट किया था।

सिर्फ इतना ही नहीं 2019 कि लोकसभा चुनाव से पहले ओपन सोसायटी फाउंडेशन ने मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए राफेल मुद्दे पर झूठी कहानी गढ़ी। इस राफेल मुद्दे पर ही राहुल गांधी को कोर्ट में माफी मांगने पड़ी थी।

मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान जिस एनएससी के माध्यम से वामपंथियों और सोनिया गांधी के करीबियों के द्वारा देश में सरकार चलाई जाती थी उसके अधिकतर सदस्य हिंदू विरोधी थे और उनके संबंध ओपन सोसायटी फाउंडेशन से भी जुड़े हुए थे। इनके ही कहने पर वर्ष 2011 में सांप्रदायिक हिंसा बिल का मसौदा तैयार किया गया था जो कि पूर्णतः हिंदू विरोध पर लाया गया था जिसका भाजपा और मुख्य रूप से नरेंद्र मोदी ने जमकर विरोध किया।

कथित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ओपन सोसायटी फाउंडेशन के स्पीकर रह चुके हैं और जॉर्ज सोरोस ने अमर्त्य सेन को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है जिसका नाम है - अमर्त्य सेन: द कंटेंट ऑफ डेमोक्रेसी।

 

लेख

शुभम उपाध्याय
संपादक, द नैरेटिव
चीन संबंधित विषय के जानकार, वामपंथ उग्रवाद विशेषज्ञ, अंतरराष्ट्रीय राजनीति एवं कूटनीति पर टिप्पणीकार


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