21वीं सदी में भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियां और विकास

21वीं सदी में भारतीय लोकतंत्र के सामने बढ़ती चुनौतियाँ और विकास की राह; स्थिर सरकार, आर्थिक प्रगति और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव की दिशा में नया युग।

The Narrative World    09-Nov-2024
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मानव समाज में जब राष्ट्र की कल्पना हुई होगी, तो उस राष्ट्र को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्य और शासन प्रणाली की भी कल्पना की गई होगी। राष्ट्र के समस्त प्रजाजन अपनी योग्यता के अनुसार कार्य करते हुए समाज और राष्ट्र की सेवा करते रहें; इसलिए प्रजातंत्रीय शासन प्रणाली ही ऐसी प्रणाली है जिसमें सत्ता जनता में निहित होती है। जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि ही शासक होते हैं। प्रजातंत्र को जनतंत्र या गणतंत्र भी कहा जाता है।
 
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संयुक्त राज्य अमेरिका के बहु-लोकप्रिय राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने कहा था कि "लोकतंत्र जनता का, जनता द्वारा, और जनता के लिए बनाई गई शासन व्यवस्था है।" उनका मानना था कि लोकतंत्र एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें सभी व्यक्तियों के समान अधिकार होते हैं। एक अच्छा लोकतंत्र वह है जिसमें राजनीतिक और सामाजिक न्याय के साथ-साथ आर्थिक न्याय की व्यवस्था भी होती है। यह शासन प्रणाली लोगों को सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करती है।
 
भारत विश्व का सबसे बड़ा और प्राचीन राष्ट्र है। यहाँ पहले गणतंत्र शासन प्रणाली विकसित थी; बाद में राजतंत्र आया, और अंग्रेजों के साथ यह व्यवस्था स्वतंत्रता से पूर्व तक अस्तित्व में रही। 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोकतंत्र की स्थापना हुई, और हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, जिसे भारत की संविधान सभा के विशेषज्ञों ने बनाया।
 
भारत में संसदीय प्रणाली लागू की गई, और 1952 से आम चुनाव नियमित रूप से संपन्न होने लगे। अब तक 18 आम चुनाव संपन्न हो चुके हैं। हाल ही में 2024 में लोकसभा के आम चुनाव संपन्न हुए, और वर्तमान में भारत में सर्वाधिक 96 करोड़ मतदाता हैं, जिससे यह विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बन गया है।
 
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भारत में प्रति पाँच वर्ष में ग्राम पंचायत, नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा के चुनाव होते हैं। विधान परिषद और राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है, लेकिन हर दो वर्ष में रिटायर हो जाने वाले सदस्यों के स्थान के लिए चुनाव होता है। पहले मतदान की आयु 21 वर्ष थी, जिसे राजीव गांधी की सरकार ने घटा कर 18 वर्ष कर दिया।
 
स्वतंत्रता के बाद भारत को गरीबी, बेरोजगारी, और खाद्यान्न का अभाव विरासत में मिला। असमान वर्षा के कारण बाढ़ और सूखे की स्थिति अक्सर बनी रहती थी। भारत एक अविकसित अर्थव्यवस्था वाला देश था, लेकिन विकासशील बनने के लिए पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा कृषि, उद्योग, परिवहन, बैंकिंग और वाणिज्य में सुधार किए गए। सिंचाई, उर्वरक, और कृषि उपकरणों की सुविधा बढ़ने से हरित क्रांति और श्वेत क्रांति आई, और हम खाद्यान्न व दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गए।
 
21वीं सदी में भारतीय लोकतंत्र में विकास की गति तेज हो गई है और एक बार फिर बहुमत वाली सुदृढ़ सरकारों का दौर आया है। अब, लोकतंत्र में स्थिर और मजबूत सरकारों का युग है, और भारतीय गणराज्य का तेजी से विकास हो रहा है। परिवहन और संचार प्रौद्योगिकी में भी तेजी से आधुनिकीकरण किया गया है।
 
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भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो रही है। पहले वह विश्व में दसवें स्थान पर थी, लेकिन आज यह चौथे स्थान पर आ गई है और पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गई है।
 
अब इसका मुकाबला अमेरिका, चीन, और जर्मनी से है। भारत के पाँच राज्य - महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश - कुछ वर्षों में एक ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्थाएं बन जाएंगे। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, असम, और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भी इस दौड़ में शामिल हो सकते हैं।
 
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भारत ने विकास की ऐसी योजनाएँ बनाई हैं कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7-8% हो गई है, जोकि विकसित देशों से अधिक है। जब विश्व के अधिकांश देश मंदी का सामना कर रहे हैं, भारतीय बाजार पर इसका असर नहीं पड़ा है। भारत अब 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है।
 
वर्तमान मजबूत सरकारों ने नीतिगत ढांचे को सुदृढ़ किया है, अनियंत्रित भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाया है, और लाइसेंस राज को व्यवस्थित किया है। अब विदेशी कंपनियों के लिए भारत एक प्रमुख निवेश स्थल बन गया है।
 
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भारत की विदेश नीति में भी परिवर्तन आया है। पहले यह पश्चिम देशों की तकनीक और व्यापार तथा पश्चिम एशिया के तेल की राजनीति से प्रभावित थी। अब, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वतंत्र विदेश नीति का विकास हुआ है, और भारत संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, चीन और यूरोपीय देशों के साथ समकक्ष भूमिका निभा रहा है।
 
प्रधानमंत्री मोदी, 2014 और 2019 के बाद तीसरे कार्यकाल में भी सबसे शक्तिशाली भारतीय नेता के रूप में उभरे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की उपस्थिति को महत्व दिया जाता है, और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता पर विचार हो रहा है।
 
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भारत ने अपनी सशस्त्र सेनाओं को आधुनिक हथियारों से सुसज्जित कर सीमा को सुदृढ़ बनाया है। भारतीय सेना, थल, नभ, और जल में शक्तिशाली हो रही है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) नित नए प्रयोग कर आधुनिक हथियारों का विकास कर रहा है, और भारत अब इनका निर्यात भी करने लगा है।
 
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देश का चहुंमुखी विकास हो रहा है। भारत ने मशीन, परिवहन, संचार, निर्माण कार्य, विद्युत, अभियांत्रिकी, और सैन्य सामग्री निर्माण में तेजी से प्रगति की है।
 
देश में उच्च तकनीक के साथ सड़कों, रेलवे और वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण किया गया है। हवाई अड्डों का विस्तार हुआ है, और आयात-निर्यात के लिए मुंबई, कोलकाता, कांडला, कोच्चि, विशाखापत्तनम और पारादीप बंदरगाहों का विकास हुआ है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान और मंगलयान जैसे सफल परीक्षण किए हैं, जिससे अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत को विशेष सफलता मिली है।
 
भारतीय लोकतंत्र में तेजी से आर्थिक विकास हो रहा है। हालाँकि, आंतरिक वातावरण में बाधाएँ मौजूद हैं। स्वतंत्रता के सात दशक बाद भी भारतीय लोकतंत्र पूरी तरह से परिपक्व नहीं हो पाया है।
 
भारतीय नागरिक, पश्चिमी देशों की तरह राष्ट्र हित में सकारात्मक सोच विकसित नहीं कर पाए हैं, और चुनाव के समय जाति, धर्म, धन, और मानवीय ताकत प्रभावित कर देती है।
 
लोकतंत्र और निर्वाचन में नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। नागरिकों की निष्पक्षता और समझदारी लोकतंत्र को सही दिशा में चलाने में मदद करती है। राजनीतिक दलों पर अंकुश लगाने के लिए नागरिकों का सजग और जिम्मेदार होना आवश्यक है।
 
लेख
 
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इंदु शेखर त्रिपाठी
स्तंभकार - Writers For The Nation