छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई: 22 खूनी नक्सली ढेर, देशद्रोही आतंक पर करारा प्रहार!

मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए, जिनमें अत्याधुनिक एके-47 जैसे हथियार भी शामिल हैं।

The Narrative World    20-Mar-2025   
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रायपुर, मार्च 20 (द नैरेटिव वर्ल्ड): छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर जिलों में सुरक्षाबलों ने गुरुवार को नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 22 नक्सलियों को मार गिराया।
 
इस दौरान एक बहादुर पुलिस जवान भी शहीद हो गया। यह मुठभेड़ नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा थी, जिसमें पिछले कुछ महीनों से सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है।
 
मुठभेड़ का पूरा घटनाक्रम
 
स्थान: बीजापुर और कांकेर जिलों के घने जंगलों में यह मुठभेड़ हुई, जो नक्सलियों का एक मजबूत गढ़ माना जाता है।
 
समय: यह मुठभेड़ सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई और कई घंटों तक चली।
 
शहीद जवान: राज्य पुलिस के डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) का एक जवान भी वीरगति को प्राप्त हुआ।
 
बरामद हथियार: मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए, जिनमें अत्याधुनिक एके-47 जैसे हथियार भी शामिल हैं।
 
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान
 
यह कार्रवाई उन नक्सली समर्थकों और मानवाधिकार के नाम पर आतंकियों का बचाव करने वालों के लिए करारा जवाब है, जो देश के दुश्मनों को वैचारिक समर्थन देते हैं।
 
सुरक्षाबलों ने यह साबित कर दिया कि अब सरकार और प्रशासन नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
 
इससे पहले भी बीजापुर के इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में हुई एक मुठभेड़ में 31 नक्सलियों को मार गिराया गया था।
 
इस साल की शुरुआत से अब तक कुल 81 नक्सली मारे जा चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि सुरक्षा बल लगातार नक्सलियों की कमर तोड़ रहे हैं।
 
नक्सलवाद की जड़ें और सरकार का रुख
 
नक्सली संगठनों ने वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में हिंसा और आतंक का माहौल बना रखा है।
 
ये संगठित अपराधी केवल विकास कार्यों में बाधा डालते हैं और भोले-भाले जनजातियों को गुमराह कर उन्हें हथियार उठाने के लिए मजबूर करते हैं।
 
छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार की संयुक्त रणनीति के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि लोग इन आतंकियों के बहकावे में न आएं।
 
पुल, सड़कें, स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे नक्सली गतिविधियों में कमी आए।
 
देश विरोधी शक्तियों को करारा जवाब
 
यह मुठभेड़ नक्सलवाद को समर्थन देने वाले उन तथाकथित बुद्धिजीवियों और एनजीओ के लिए भी एक चेतावनी है, जो इनके कृत्यों को जायज ठहराते हैं।
 
सुरक्षाबलों की इस जीत ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि भारत अब किसी भी आतंकी विचारधारा को बर्दाश्त नहीं करेगा।
 
अगला कदम क्या?
 
सरकार की ओर से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाई जा रही है और आने वाले समय में और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
 
अब समय आ गया है कि नक्सलियों और उनके समर्थकों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जाए और देश को इस आंतरिक आतंकवाद से मुक्त किया जाए।