पंजाब के एक स्वयंभू ईसाई पादरी बजिंदर सिंह, जो "चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विजडम" के संस्थापक हैं, एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं।
हाल ही में वायरल हुई एक
सीसीटीवी फुटेज ने उनके असली चेहरे को उजागर कर दिया है।
इस फुटेज में बजिंदर अपने ऑफिस में कर्मचारियों, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं, पर हमला करते नजर आ रहे हैं।
यह घटना फरवरी 2025 की बताई जा रही है, और इसके बाद ही मार्च 2025 में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न, पीछा करने और धमकाने के आरोपों में FIR दर्ज हो चुकी है।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब बजिंदर सिंह पर गंभीर आरोप लगे हों।
उनकी काली करतूतों का इतिहास लंबा और शर्मनाक है, जो धार्मिक आडंबर के पीछे छिपा हुआ है।
बजिंदर सिंह का जन्म हरियाणा के यमुनानगर में एक जाट परिवार में हुआ था। 2000 के दशक में हत्या के एक मामले में जेल में बंद रहते हुए उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया।
जेल से बाहर आने के बाद, उन्होंने 2012 में "चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विजडम" की स्थापना की और खुद को "प्रॉफेट" कहलवाना शुरू किया।
उनके चमत्कारी इलाज के दावों ने गरीब और अशिक्षित लोगों को आकर्षित किया, खासकर पंजाब में, जहां उन्होंने सिखों और हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने का अभियान चलाया।
लेकिन उनके ये दावे और धार्मिक प्रचार महज एक मुखौटा थे, जिसके पीछे उनकी आपराधिक मानसिकता छिपी थी।
2018 में बजिंदर पर चंडीगढ़ में एक महिला के साथ बलात्कार का आरोप लगा। पीड़िता ने दावा किया कि बजिंदर ने उसे विदेश भेजने के बहाने अपने घर बुलाया, वहां उसका यौन शोषण किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया।
दिल्ली हवाई अड्डे से लंदन भागने की कोशिश करते वक्त पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
हालांकि, वह जमानत पर रिहा हो गए, लेकिन यह मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है।
इसके अलावा, आयकर विभाग ने 2023 में उनकी संपत्तियों पर छापेमारी की, जब उन पर चमत्कार के नाम पर लोगों से ठगी करने के आरोप लगे।
एक परिवार ने दावा किया कि बजिंदर ने उनकी मृत बेटी को जिंदा करने का वादा करके 80,000 रुपये ठग लिए।
अब ताजा सीसीटीवी फुटेज ने बजिंदर की हिंसक प्रवृत्ति को सामने ला दिया है। वीडियो में वह एक कर्मचारी पर मोबाइल फोन फेंकते हैं, उसे थप्पड़ मारते हैं, और फिर एक महिला पर कागजों का ढेर फेंककर उसे धक्का देते हैं।
यह सब तब हो रहा है, जब वह पहले से ही यौन उत्पीड़न के एक मामले में जांच के घेरे में हैं।
22 साल की एक युवती ने आरोप लगाया कि 17 साल की उम्र से बजिंदर उसका शोषण कर रहे थे।
उसने बताया कि पादरी ने उसे शादी के लिए दबाव डाला, उसका पीछा किया और परिवार को मारने की धमकी दी।
ये आरोप न सिर्फ बजिंदर की नैतिकता पर सवाल उठाते हैं, बल्कि उनके धार्मिक प्रचार की मंशा को भी संदिग्ध बनाते हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि बजिंदर का प्रभाव पंजाब में बढ़ता जा रहा है। उनके सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स हैं, और वह "मेरा यशु यशु" जैसे गानों के जरिए लोगों को लुभाते हैं।
लेकिन यह चमक-दमक सिख और हिंदू समुदायों को तोड़ने का एक हथियार बन रही है।
कई लोग उनके प्रभाव में आकर अपने मूल धर्म को छोड़ रहे हैं, जबकि बजिंदर की असलियत क्रूरता, ठगी और शोषण से भरी हुई है।
“जनता में गुस्सा बढ़ रहा है, और सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक ऐसे ढोंगियों को खुली छूट मिलेगी?”
बजिंदर सिंह जैसे लोग धर्म के नाम पर समाज को बांट रहे हैं और कमजोर लोगों का शोषण कर रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि उनकी सजा दूसरों के लिए सबक बने।
यह वक्त है कि हम ऐसे पाखंडियों के खिलाफ आवाज उठाएं और अपने समाज को उनके चंगुल से बचाएं।