छत्तीसगढ़ में साल 2023 में एक सैनिक की निर्मम हत्या के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गुरुवार को बड़ी कामयाबी हासिल की है।
इस जघन्य अपराध के पीछे नक्सलियों की कायराना साजिश को उजागर करते हुए NIA ने चार नक्सली समर्थकों को
गिरफ्तार किया है।
ये नीच नक्सली, जो देश की एकता और शांति को तार-तार करने में लगे हैं, अब कानून के शिकंजे में फंस गए हैं।
गिरफ्तार किए गए इन देशद्रोहियों के नाम भवन लाल जैन उर्फ भुवन जैन, सुरेश कुमार सलाम, शैलेंद्र कुमार बघेल उर्फ गोलू और अंदुराम सलाम हैं।
ये सभी प्रतिबंधित नक्सली संगठन CPI (माओवादी) के ओवरग्राउंड वर्कर (OGWs) और समर्थक हैं।
ये लोग न केवल हत्या की योजना में शामिल थे, बल्कि नक्सलियों के गैरकानूनी और अपराधी कृत्यों को बढ़ावा देने में भी सक्रिय थे।
NIA की जांच से साफ हो गया है कि ये लोग नक्सलियों के लिए हथियारों और संसाधनों का इंतजाम करते थे, जिससे ये आतंकी संगठन देश के खिलाफ अपनी जहरीली साजिशों को अंजाम दे सके।
इनके खून में देशद्रोह भरा हुआ है और ये हर उस शख्स के दुश्मन हैं जो देश की तरक्की और शांति चाहता है।
हवलदार मोतीराम अचला, जो नॉर्थ-ईस्ट में तैनात थे, फरवरी 2023 में अपने गांव बड़े देवड़ा आए थे।
यह गांव उत्तर बस्तर के कांकेर जिले में है, जो नक्सलियों के आतंक से ग्रस्त इलाकों में से एक है।
एक स्थानीय मेले के दौरान इन कायर नक्सलियों ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी।
यह घटना नक्सलियों की उस नीच मानसिकता को दर्शाती है, जो मासूमों और देश के रक्षकों को निशाना बनाकर अपनी कायराना हरकतों को अंजाम देते हैं।
NIA ने इस मामले को छत्तीसगढ़ पुलिस से एक साल बाद अपने हाथ में लिया था।
इसके बाद से एजेंसी ने कड़ी मेहनत और गहन जांच के जरिए इन अपराधियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
जांच के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी बरामद किए गए, जो इन नक्सली समर्थकों की गहरी साजिश को उजागर करते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन चारों ने नक्सलियों को हथियारों और लॉजिस्टिक सपोर्ट के साथ-साथ छिपने की जगह भी मुहैया कराई थी।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही हैं।
हाल के महीनों में सुरक्षाबलों ने कई बड़े ऑपरेशन चलाकर इन आतंकियों को सबक सिखाया है। पिछले साल नवंबर में
“छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस मामले में दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की थी।”
इसके बाद फरवरी 2024 में NIA ने केस को अपने हाथ में लिया और अब इन चार देशद्रोहियों को पकड़कर एक और बड़ी सफलता हासिल की।
नक्सलियों की यह कायराना सोच अब अपने अंत की ओर बढ़ रही है। देश की जनता और सुरक्षाबल इनके खिलाफ एकजुट होकर लड़ रहे हैं।
इन गिरफ्तारियों से साफ है कि नक्सलियों के मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे। ये लोग जंगल में छिपकर जो आतंक मचाते हैं, वह अब ज्यादा दिन नहीं चलेगा।
सरकार ने 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया है और इस दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।
यह कार्रवाई न केवल मोतीराम अचला के परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में एक कदम है, बल्कि नक्सलियों की उस जहरीली विचारधारा को कुचलने का भी संदेश देती है, जो देश को कमजोर करने की कोशिश करती है।
नक्सलियों को समझ लेना चाहिए कि उनकी हर साजिश का जवाब अब कानून और सुरक्षाबल देंगे। ये देशद्रोही अब बच नहीं पाएंगे।