3 अप्रैल 2021: सुकमा-बिजापुर के वीरों का बलिदान, जब नक्सलियों की कायरता ने 22 जवानों की जान ली!

सुरक्षा बलों को सूचना मिली थी कि कुख्यात माओवादी कमांडर "हिडमा" इसी इलाके में छिपा हुआ है।

The Narrative World    01-Apr-2025   
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छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिले की घने जंगलों में 3 अप्रैल 2021 को भारतीय सुरक्षा बलों पर एक कायराना हमला हुआ।
 
माओवादियों द्वारा रची गई इस खूनी साजिश में 22 वीर जवान शहीद हो गए और 30 से अधिक घायल हो गए।
 
यह हमला भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ की गई सबसे क्रूरतम घटनाओं में से एक था, जो माओवादी आतंकवाद की बर्बरता और नृशंसता को दर्शाता है।
 
यह हमला 'ऑपरेशन प्रहार' के तहत हुआ, जिसे भारतीय सुरक्षा बलों ने माओवादी आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए शुरू किया था।
 
यह ऑपरेशन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG), और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त कार्रवाई थी।
 
सुरक्षा बलों को सूचना मिली थी कि कुख्यात माओवादी कमांडर 'हिडमा' इसी इलाके में छिपा हुआ है।
 
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परंतु, यह एक षड्यंत्र निकला और माओवादियों ने सुरक्षा बलों को जाल में फंसाकर उनके खिलाफ यह नृशंस हमला कर दिया।
 
इस हमले में करीब 250 माओवादी आतंकियों ने सुरक्षा बलों को तीन तरफ से घेर लिया और चार घंटे तक लगातार गोलीबारी की।
 
उन्होंने ग्रेनेड और रॉकेट लॉन्चरों का भी इस्तेमाल किया। नक्सलियों की बर्बरता इस हद तक बढ़ गई कि वे शहीद जवानों के हथियार तक लूट ले गए।
 
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हालाँकि, इस मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिसमें लगभग 20 नक्सली मारे गए।
 
माओवादियों ने हमेशा जनजातियों और गरीबों के हितैषी होने का ढोंग किया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि वे इन इलाकों में विकास नहीं होने देना चाहते।
 
सड़कें, स्कूल, अस्पताल, और अन्य सुविधाएं अगर इन क्षेत्रों में आएंगी, तो उनकी नापाक सत्ता खत्म हो जाएगी। इसलिए, वे निर्दोष नागरिकों को ढाल बनाकर अपनी हिंसक गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
इस जघन्य हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ और कड़े कदम उठाने का संकल्प लिया।
 
सुरक्षाबलों ने व्यापक तलाशी अभियान चलाकर नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा खोला। देश के वीर जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा, यह तय है कि भारत सरकार और सुरक्षाबल इस नक्सली आतंक को पूरी तरह खत्म करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। और ऐसा हो भी रहा है
 
माओवाद कभी भी एक विचारधारा नहीं था, सिर्फ और सिर्फ आतंक का पर्यायवाची था और है, जिसे हर हाल में कुचलना होगा।
 
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यह हमला हमें यह याद दिलाता है कि माओवादी आतंकवादी देश और समाज के दुश्मन हैं।
 
और हाल ही में किए गए एंटी-नक्सल एनकाउंटर्स में अधिक संख्या में नक्सलियों को मार गिराया जा रहा है, जिससे यह साफ है कि उन वीर जवानों के बलिदान व्यर्थ नहीं जा रहे हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
 
भारत के वीर जवानों का यह बलिदान हमें माओवादी आतंक के खिलाफ लड़ने की शक्ति देता है और इस अभिशाप को जड़ से मिटाने की प्रेरणा देता है।