पश्चिम बंगाल इन दिनों अराजकता और अव्यवस्था के भंवर में फंस गया है, जहां हिंदू समुदाय पर लक्षित हमले बढ़ते जा रहे हैं।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार इस बढ़ती हिंसा को रोकने में नाकाम साबित हुई है।
मंदिरों में तोड़फोड़, आगजनी, हिंदू व्यापारियों और घरों पर हमले जैसे मामले सामने आ रहे हैं।
ममता बनर्जी की तुष्टिकरण की राजनीति और पुलिस की निष्क्रियता ने स्थिति को और बदतर बना दिया है।
मार्च 2025 में ही पश्चिम बंगाल में हिंदू समुदाय पर आठ हमले दर्ज किए गए हैं, जो इस सरकार की विफलता का जीता-जागता सबूत हैं।
मंदिरों पर हमले और तोड़फोड़: हिंदुओं का अपमान
7 मार्च को दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर शहर में मां शीतला की मूर्ति को कथित तौर पर एक मुस्लिम व्यक्ति शेख इंडु ने तोड़ा और आग लगा दी।
इस घटना ने हिंदुओं के बीच आक्रोश पैदा कर दिया। स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़ा, लेकिन पुलिस ने उसे "मानसिक रूप से अस्थिर" बताकर मामले को हल्का करने की कोशिश की।
इसी तरह, 9 मार्च को बशीरहाट के शंखचुरा बाजार में काली मंदिर पर हमला हुआ, जहां मूर्ति को तोड़ा गया।
बीजेपी नेता दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि यह हमला स्थानीय टीएमसी नेता शहनूर मंडल के नेतृत्व में हुआ, लेकिन पुलिस ने इसे "साम्प्रदायिक नहीं" बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
14 मार्च को नंदीग्राम के कमालपुर गांव में एक मंदिर में हिंदू देवताओं की मूर्तियों को तोड़ा गया।
बीजेपी प्रवक्ता अमित मालवीय ने इसकी निंदा की और कहा कि कुछ असहिष्णु लोग पूजा और राम नारायण कीर्तन से नाराज थे।
पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठे, क्योंकि एक वीडियो में पुलिसकर्मी पीड़ितों को धमकाते नजर आए।
30 मार्च को दक्षिण दिनाजपुर के केशबपुर गांव में शीतला मां की मूर्ति को तोड़ा गया, जिसे बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार ने "जिहादी कट्टरपंथियों" की करतूत करार दिया।
हिंदू संपत्तियों पर हमले: मुस्लिम भीड़ का आतंक
9 मार्च को मुर्शिदाबाद के नौदा ब्लॉक में पटिकाबारी बाजार में हिंदू दुकानों और संपत्तियों को निशाना बनाया गया।
बीजेपी विधायक सुवेंदु अधिकारी ने इसे "आगजनी और लूट" का मामला बताया और बीएसएफ की तैनाती की मांग की।
27 मार्च को मालदा के मोठाबारी गांव में मुस्लिम भीड़ ने हिंदू घरों और दुकानों को चुन-चुनकर नष्ट किया।
एक हिंदू महिला ने बताया कि "मुस्लिमों ने हमारे घर तोड़ दिए, हमारी संपत्ति लूट ली, और पुलिस भाग खड़ी हुई।" महिलाओं ने यह भी कहा कि उन्हें अपनी धार्मिक पहचान छिपाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जैसे सखा-पोला हटाकर हिजाब पहनना।
29 मार्च को मुर्शिदाबाद के झौबोना गांव में हिंदू पान के खेतों को आग लगा दी गई और दुकानों को लूट लिया गया।
सुकांत मजूमदार ने इसे "जिहादी भीड़" का हमला बताया और ममता सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया।
इन घटनाओं से साफ है कि मुस्लिम कट्टरपंथी हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं, और ममता सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
ममता बनर्जी की निष्क्रियता: हिंदुओं के साथ विश्वासघात
ममता बनर्जी की सरकार ने इन हमलों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
उनकी तुष्टिकरण की नीति ने कट्टरपंथियों को बढ़ावा दिया है, जिसके चलते हिंदू समुदाय असुरक्षित महसूस कर रहा है।
पुलिस की निष्क्रियता और "मानसिक अस्थिरता" जैसे बहाने बनाना इस बात का सबूत है कि ममता सरकार अपराधियों को बचाने में लगी है।
बीजेपी नेताओं ने बार-बार चेतावनी दी है कि ममता की नीतियां पश्चिम बंगाल को "पश्चिम बांग्लादेश" में बदल रही हैं, जहां हिंदू दोयम दर्जे के नागरिक बनते जा रहे हैं।
ममता बनर्जी की यह विफलता न केवल हिंदुओं के प्रति उनकी उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि उनकी वोट-बैंक की राजनीति को भी उजागर करती है।
वह मुस्लिम तुष्टिकरण में इतनी डूबी हैं कि हिंदुओं की पीड़ा उन्हें दिखाई नहीं देती। उनकी सरकार ने न तो अपराधियों को सजा दी और न ही पीड़ितों को न्याय दिलाया।
यह शर्मनाक है कि एक हिंदू-बहुल राज्य में हिंदुओं को अपनी पहचान छिपाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
निष्कर्ष: ममता सरकार को जवाब देना होगा
पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर हो रहे ये हमले निंदनीय हैं। मुस्लिम कट्टरपंथियों की यह हिंसा और ममता बनर्जी की चुप्पी हिंदू समुदाय के लिए खतरे की घंटी है।
ममता सरकार को अपनी नाकामी और तुष्टिकरण की नीति के लिए जवाब देना होगा।
हिंदुओं का धैर्य अब जवाब दे रहा है, और यह समय है कि इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई जाए।
ममता बनर्जी को समझना चाहिए कि सत्ता अस्थायी होती है, लेकिन जनता का विश्वास खोने की कीमत उन्हें भारी पड़ सकती है।हिंदुओं के साथ यह विश्वासघात अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।