"राम नवमी" वह दिन जब सम्पूर्ण भारत भगवान श्रीराम के जन्म का उत्सव धूमधाम से मनाता है।
लेकिन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार ने इस पावन पर्व को मनाने पर कई कठोर प्रतिबंध लगाए हैं।
ऐसा प्रतीत होता है मानो राज्य सरकार हिंदू समाज को उनके धार्मिक अधिकारों से वंचित करना चाहती है।
राम नवमी पर असहनीय प्रतिबंध
हर साल की तरह इस साल भी बंगाल में राम नवमी मनाने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन ममता सरकार ने आयोजनकर्ताओं पर ऐसी पाबंदियाँ लगाई हैं जो उनके इरादों को ही संदेह के घेरे में डालती हैं।
हिंदू संगठनों को पुलिस द्वारा यह निर्देश दिया गया कि किसी भी जुलूस में 200 से अधिक लोग शामिल नहीं हो सकते।
इसके अलावा, आयोजकों को इस शर्त पर सहमति देनी पड़ी कि जुलूस में किसी प्रकार का शस्त्र (यहां तक कि भगवा ध्वज फहराने के लिए इस्तेमाल होने वाली लाठी भी) नहीं ले जाया जाएगा।
यह प्रतिबंध यहीं समाप्त नहीं होते। पुलिस ने आदेश दिया कि राम नवमी के जुलूस किसी भी मस्जिद के पास से नहीं गुजर सकते और न ही उन क्षेत्रों से जहाँ मुस्लिम समुदाय के लोग निवास करते हैं।
धार्मिक गीतों और भजनों को लाउडस्पीकर पर बजाने की अनुमति नहीं दी गई, और यहां तक कि धार्मिक नारों को भी धीमी आवाज़ में बोलने का निर्देश दिया गया।
आयोजकों को बार-बार पुलिस द्वारा बुलाया गया और उन पर यह दबाव डाला गया कि वे अपने जुलूस को छोटा करें और उसे सीमित समय में समाप्त करें।
उन्हें यह चेतावनी भी दी गई कि अगर किसी भी प्रकार की हिंसा होती है, तो उसके लिए आयोजक ही जिम्मेदार होंगे।
ममता सरकार की हिंदू विरोधी मानसिकता
पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल में हिंदू त्योहारों को बाधित करने की प्रवृत्ति देखी गई है।
पिछले हफ्ते ही मालदा जिले के मोथाबाड़ी इलाके में मुस्लिम भीड़ ने हिंदू व्यापारियों और घरों पर हमला कर दिया।
यह हिंसा केवल इसलिए भड़की क्योंकि एक धार्मिक शोभायात्रा मस्जिद के पास से गुज़री थी और उसमें बजने वाले भजनों से कुछ मुस्लिम लोग कथित तौर पर नाराज हो गए।
मुस्लिम भीड़ ने अगले दिन हिंदू घरों और दुकानों में लूटपाट और तोड़फोड़ की।
यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में बंगाल के विभिन्न हिस्सों में हिंदू त्योहारों के दौरान ऐसी घटनाएँ बार-बार घटित होती रही हैं, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार इन हमलावरों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं करती।
क्या ममता बनर्जी बंगाल को ‘वेस्ट बांग्लादेश’ बनाना चाहती हैं?
बंगाल में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति ने राज्य की सांप्रदायिक स्थिति को खराब कर दिया है।
बड़े पैमाने पर अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ से बंगाल की जनसंख्या संतुलन बिगड़ चुका है।
राज्य सरकार मुस्लिम कट्टरपंथियों के पक्ष में काम कर रही है और हिंदुओं को उनके ही त्योहारों को मनाने से रोक रही है।
भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, "ममता सरकार की नीति यही है कि हिंदुओं को दबाया जाए और मुस्लिम वोट बैंक को संतुष्ट रखा जाए।"
बढ़ते मुस्लिम कट्टरपंथ का खतरा
ममता सरकार के शासनकाल में बंगाल में मुस्लिम कट्टरता बढ़ी है। कट्टरपंथी मौलवियों के प्रभाव में बंगाल के मुस्लिम समाज में सलाफी इस्लाम का प्रचार-प्रसार हो रहा है।
कई इलाकों में हिंदुओं के धार्मिक अनुष्ठानों को रोकने के लिए दबाव डाला जाता है। उन्हें शंखनाद करने, घंटा बजाने, और भजन-कीर्तन करने से भी रोका जाता है।
क्या यही धर्मनिरपेक्षता है? क्या यही लोकतंत्र है?
राम नवमी पर हिन्दू समाज की ताकत दिखाने की जरूरत
ममता बनर्जी के इन प्रतिबंधों के बावजूद हिंदू समाज चुप नहीं बैठने वाला।
राम नवमी के आयोजकों का कहना है कि इस बार पहले से भी ज्यादा संख्या में लोग इस पर्व को मनाएंगे।
राम नवमी अब सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि हिंदू समाज की एकता और शक्ति का प्रतीक बन चुका है।
बंगाल के हिंदुओं को अब फैसला करना होगा कि वे ममता सरकार की तुष्टिकरण नीति के आगे झुकेंगे या अपने धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए खड़े होंगे।