2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में वक्फ बोर्ड के प्रावधानों में सुधार को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा शुरू हुई, जो देर रात तक चली।इस चर्चा के परिणामस्वरूप, वक्फ (संशोधन) बिल 288 मतों से पारित हो गया।
इस बिल के पारित होने को वनवासी कल्याण आश्रम ने एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा और इसके लिए केंद्र सरकार की सराहना की।
आश्रम ने इस संदर्भ में पिछले कुछ समय से सक्रिय भूमिका निभाई थी और संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष देश भर के विभिन्न स्थानों से ज्ञापन प्रस्तुत किए थे।
इन ज्ञापनों में जनजातीय समुदायों की जमीन की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी, जिसे जेपीसी ने गंभीरता से लिया।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में सरकार से सिफारिश की कि वक्फ बिल में जनजातियों की जमीन की सुरक्षा के लिए स्पष्ट प्रावधान शामिल किए जाएं।
वनवासी कल्याण आश्रम के पिछले 15 दिनों के सतत प्रयासों का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय कानून एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में घोषणा की कि जनजातियों की जमीन, विशेष रूप से संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत आने वाली जनजाति भूमि, वक्फ बोर्ड के दायरे से बाहर रहेगी।
यह घोषणा जनजातीय समुदायों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई, क्योंकि उनकी जमीन पर अतिक्रमण और स्वामित्व के विवाद लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं।
“वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सत्येंद्र सिंह ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि जनजातियों की भूमि को सुरक्षित रखने के लिए भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का यह कदम सराहनीय है।”
उन्होंने सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय जनजातीय समुदायों के हितों की रक्षा में मील का पत्थर साबित होगा।
इस बिल के पारित होने से पहले, वक्फ बोर्ड के पास व्यापक अधिकार थे, जिसके तहत वह किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता था। इससे जनजातीय क्षेत्रों में कई विवाद उत्पन्न हुए थे।
इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वक्फ (संशोधन) बिल 2024 में कुल 40 संशोधन प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें पारदर्शिता बढ़ाने और जनजातीय हितों की रक्षा जैसे मुद्दे शामिल थे।
वनवासी कल्याण आश्रम की सक्रियता और सरकार के इस कदम से जनजातीय समुदायों में खुशी की लहर है।
यह बिल अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां इसकी और गहन समीक्षा होगी।